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Bhojpuri Film Nadaan Ishq Ba Will be Releasing In Jan 2019

भोजपुरी फ़िल्म ‘नादान इश्क बा’ अब जनवरी में होगी रिलीज़

बिहार झारखंड में पड़ रही कड़ाके की ठंड को देखते हुए निर्माता योगेश कुमार का फैसला

एक टीनएज लव स्टोरी वाली भोजपुरी फ़िल्म ‘नादान इश्क’ 30 नवम्बर को बिहार और झारखंड में रिलीज़ होने वाली थी लेकिन वहां पड़ रहे जबरदस्त ठंड को देखते हुए अब इसकी रिलीज़ डेट आगे बढ़ा दी गई है। जी हां बिहार और झारखंड में सर्दी का मौसम अपने शबाब पर है ऐसे में निर्माता ने निर्णय लिया है कि इस फ़िल्म को अब जनवरी 2019 के अंतिम सप्ताह या फरवरी के पहले सप्ताह में रिलीज़ किया जाएगा।

आपको बता दें कि इस फ़िल्म की शूटिंग उत्तरप्रदेश के कन्नौज कानपुर में की गई है।   नेहा फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बनी इस फ़िल्म में मोहन राठौड़ की आवाज़ में भी एक गीत है। फ़िल्म के डायरेक्टर संतराम हैं। फ़िल्म में आशीष कुमार और प्रीति कुमारी की फ्रेश जोड़ी दिखेगी जबकि अवधेश मिश्रा, संजय पाण्डेय, सीपी भट्ट, जय प्रकाश सिंह और अन्नू ओझा भी अहम किरदार में होंगे। फ़िल्म के लेखक अभय यादव, डीओपी डीके शर्मा, आर्ट डायरेक्टर पप्पू राज,कोरियोग्राफर संतोष सर्वदर्शी और इपी अरबिंद सिंह हैं।

भोजपुरी के मशहूर खलनायक संजय पाण्डेय के बड़े भाई का रोल अवधेश मिश्रा इस फ़िल्म में कर रहे है। वे फ़िल्म में विलेन हैं। हीरो हीरोइन नए हैं। संतराम अच्छे लेखक डायरेक्टर है।

इस फ़िल्म के टाइटल और इसकी कहानी के बारे मे डायरेक्टर संतराम का कहना है “इश्क तो नादान होता है समझदारी से तो व्यापार होता है। इसलिए इसका नाम नादान इश्क रखा है। मुझे इस टिन एज स्टोरी के लिए 18-19 साल के लड़के लड़की चाहिए थी। मैंने इन दोनों लड़के लड़की का ओडिशन लिया. अब देखिए फ़िल्म   रिलीज़ के लिए तैयार है।”

यह एक साफ सुथरी कहानी है, कोई वल्गैरिटी नही है। टीनएजर लव स्टोरी है। फ़िल्म में छोटे बाबा का संगीत है।  नया कंटेंट है भोजपुरी सिनेमा के लिए। उम्मीद है कि दर्शको को भी पसन्द आएगा।

आशीष कुमार और प्रीति कुमारी इस क्यूट सी लव स्टोरी को लेकर बेहद एक्साइटेड हैं। इसमें दलित फैमिली से लड़का बिलोंग करता है।  कहानी जातपात के उपर है। लोगों को इसमें कानपुर की लोकेशन देखने को मिलेगी।

फ़िल्म के मुख्य कलाकार आशीष कुमार और प्रीति कुमारी का कहना है कि कानपुर में फ़िल्म की शूटिंग को हमने खूब एन्जॉय किया। रियल लोकेशन पर शूट करना बड़ा यादगार अनुभव रहा। निर्माता योगेश कुमार को विश्वास है कि भोजपुरी दर्शक फ़िल्म नादान इश्क बा को अवश्य पसन्द करेंगे।

———Akhlesh Singh(PRO)

Sanyukt Vikas Party’s Anthem Song Record At Lata Mangeshkar Studios

लता मंगेशकर स्टूडियो में संयुक्त विकास पार्टी का एंथम सॉन्ग रेकॉर्ड।

मुम्बई में स्थित लता मंगेशकर स्टूडियो में पिछले दिनों संयुक्त विकास पार्टी का टाइटल गानाअरविंदर सिंह,अक्षय उपाध्याय, अमन सिंह राजपूत,सना खान,अनुराग मौर्या, प्रीति दुबे के आवाज़ में  रिकॉर्ड किया गया। ‘आएगी आएगी संयुक्त विकास पार्टी’ नामक इस एल्बम को कौशल फिल्म्स प्रोडक्शन हॉउस के बैनर तले बनाया गया है।

    

जिसके संगीतकार अफ़रोज़ खान है जबकि इसके निर्माता कैलाश कौशल कुमार है। इसके निर्देशक प्रकाश श्रीवास्तव हैं। कौशल फ़िल्म प्रोडक्शन हाउस के बैनर तले बने इस एल्बम में ये आर्टिस्ट दिखाई देंगे। कल्पना शाह, परी सिंघानिया, अविनाश शाही, अरविंदर सिंह, धनन्जय सिंह, अक्षय उपाध्याय, सनम प्रीत कौर और जसलीन कौर। इस अल्बम की विशेषता ये होगी कि इसके वीडियो को फिल्मो के गीतों की तरह शूट किया जाएगा। संगीतकार अफ़रोज़ खान अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर बेहद उत्साहित है। निर्माता कैलाश कौशल कुमार का कहना है कि इस म्यूजिक एलबम में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया है वे बेहद खूबसूरत है, जिन्हें अफ़रोज़ खान ने बड़ी मधुरता से कम्पोज़ किया है। इसके गीत यूथ श्रोताओं और दर्शको के दिलो को छू जाएंगे।

यह गीत संयुक्त विकास पार्टी का एंथम सांग है जिसे बड़ी शिद्दत से कम्पोज़ किया है अफ़रोज़ खान ने। इस गीत में उत्साह और विकास की बात की गई है साथ ही जैसा कि पार्टी का नाम हैं संयुक्त विकास पार्टी। इसमे इस बात का ज़िक्र भी है कि संयुक्त रहने से किस तरह विकास संभव है।

—–Akhlesh Singh (PRO)

Re Tune First Choice Of New Singer & Music Directors

नए कलाकारों की पहली पसंद बनी री ट्यून
भोजपुरी संगीत जगत में आइ क्रांति ने कलाकारों और गायको को प्लेटफ़ार्म उपलब्ध कराने के कई स्थान उपलब्ध तो करा दिए लेकिन सही स्थान के अभाव में कलाकार ख़ुद को ठगा महसूस करते हैं । ऐसे में नए कलाकारों को उनकी प्रतिभा उभारने के लिए बड़े कैनवास पर उतरी री ट्यून ने कम समय में ही कलाकारों और संगीत प्रेमियों के दिल में जगह बना ली है ।

री ट्यून के प्रमुख अशोक कुमार दीप भोजपुरी गीत संगीत के पुरोधा माने जाते है । कई बड़ी म्यूज़िक कम्पनियों में भोजपुरी को मुकम्मल स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके अशोक कुमार दीप ने बताया कि आधुनिकीकरण ख़ास कर बाज़ारीकरण के इस दौर में संगीत कम्पनियाँ मात्र व्यू के लिए काम कर रही है पर री ट्यून का उद्देश्य भोजपुरी संगीत प्रेमियों को साफ़ सुथरी और कर्ण प्रिय संगीत उपलब्ध कराना है । उन्होंने बताया कि कम समय में ही काफ़ी नए गायक री ट्यून से जुड़ चुके हैं और इसकी संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है । बहरहाल , री ट्यून ने भोजपुरी संगीत के क्षेत्र में एक नई शुरुआत कर दी है जिसका दूरगामी परिणाम भी दिखना शुरू हो चुका है ।
—–Akhlesh Singh (PRO)

If the poem comes out of the heart of the poet and touches the heart of the reader, then it becomes variable. This talk applies to Shri Vinod Kumar Tripathi’s poetry

कविता अगर शायर के दिल से निकले और पढ़नेवालों के दिल को छू जाय तो वो चरितार्थ हो जाती है। ये बात श्री विनोद कुमार त्रिपाठी जी की शायरी पर पूरी तरह लागू होती है

कविता अगर शायर के दिल से निकले और पढ़नेवालों के दिल को छू जाय तो वो चरितार्थ हो जाती है। ये बात श्री विनोद कुमार त्रिपाठी जी की शायरी पर पूरी तरह लागू होती है जिनकी किताब “ मेरी ज़मीन मेरा आसमां” हिंदुस्तान के उर्दू के जाने माने प्रकाशक  अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिंद) ने अभी हाल ही में प्रकाशित की है और जो उर्दू हलक़े में अपने नएपन और ईमानदार अभिव्यक्ति के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

विनोद कुमार त्रिपाठी जी भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी है जो कमिशनर इनकम टैक्स के पद पर तैनात थे और आज कल रिलायंस ग्रूप में प्रेज़िडेंट के पद पर कार्यरत हैं. इसके पूर्व वो कुछ समय के लिए नैशनल टेक्सटाइल्स कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डिरेक्टर भी थे।

त्रिपाठी जी इलाहाबाद के रहने वाले हैं और  इस किताब के प्रकाशन से पूर्व उन्होंने उर्दू भी सीखी और यही वजह है की उनकी शायरी उर्दू में पहले प्रकाशित हुई। इसका हिन्दी संस्करण राधा कृष्ण  प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है और जल्दी ही पाठकों के सामने आ जाएगा। इनकी किताब के चंद शेर आपके सामने प्रस्तुत हैं –

“अब यहाँ कोई ख़रीदार नहीं ख़्वाबों का

मैंने बाज़ार में कल रात हक़ीक़त बेची “

या फिर

“बात जो मुझमें शोर करती है

मुझसे कहने से रह गयी होगी “

या फिर

“नींद टूटी तो “बशर” जाके ये एहसास हुआ

जिसको हाथों से सँवारा था वो सपना निकला “

विनोद कुमार त्रिपाठी जी ‘बशर’ तख़ल्लुस से शायरी करते हैं। उनका एक मजमुआ “मेरी ज़मीन के लोग” २००२ में प्रकाशित हो चुका है।त्रिपाठी जी यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज  इलाहाबाद में  राजनीति शास्त्र के लेक्चरर भी रहे है और समाज सेवा के साथ साथ खेलकूद में भी काफ़ी रुचि रखते हैं। शायद यही वजह है कि वो भावनात्मक स्तर पर इंसान से भरपूर परिचित है और ये बात उनकी शायरी में बख़ूबी दिखती है जब वो लिखते हैं कि

“हरेक फ़र्ज़ का रिश्ता तो बस ज़मीर से है

किसी पे हम कोई एहसां कभी नहीं करते”

या फिर

“ हमारे हिस्से में सागर था, हाथ क्या आता

ज़मीं को बांटा यूँ किसने, निज़ाम किसका था”

त्रिपाठी जी की ये किताब Amazon पर भी उपलब्ध है और साथ ही साथ उर्दू के सभी मशहूर बुक स्टोर पर  भी पायी जा सकती है

If the poem comes out of the heart of the poet and touches the heart of the reader, then it becomes variable. This talk applies to Shri Vinod Kumar Tripathi’s poetry

कविता अगर शायर के दिल से निकले और पढ़नेवालों के दिल को छू जाय तो वो चरितार्थ हो जाती है। ये बात श्री विनोद कुमार त्रिपाठी जी की शायरी पर पूरी तरह लागू होती है

कविता अगर शायर के दिल से निकले और पढ़नेवालों के दिल को छू जाय तो वो चरितार्थ हो जाती है। ये बात श्री विनोद कुमार त्रिपाठी जी की शायरी पर पूरी तरह लागू होती है जिनकी किताब “ मेरी ज़मीन मेरा आसमां” हिंदुस्तान के उर्दू के जाने माने प्रकाशक  अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू (हिंद) ने अभी हाल ही में प्रकाशित की है और जो उर्दू हलक़े में अपने नएपन और ईमानदार अभिव्यक्ति के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है।

विनोद कुमार त्रिपाठी जी भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी है जो कमिशनर इनकम टैक्स के पद पर तैनात थे और आज कल रिलायंस ग्रूप में प्रेज़िडेंट के पद पर कार्यरत हैं. इसके पूर्व वो कुछ समय के लिए नैशनल टेक्सटाइल्स कॉर्पोरेशन के मैनेजिंग डिरेक्टर भी थे।

त्रिपाठी जी इलाहाबाद के रहने वाले हैं और  इस किताब के प्रकाशन से पूर्व उन्होंने उर्दू भी सीखी और यही वजह है की उनकी शायरी उर्दू में पहले प्रकाशित हुई। इसका हिन्दी संस्करण राधा कृष्ण  प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है और जल्दी ही पाठकों के सामने आ जाएगा। इनकी किताब के चंद शेर आपके सामने प्रस्तुत हैं –

“अब यहाँ कोई ख़रीदार नहीं ख़्वाबों का

मैंने बाज़ार में कल रात हक़ीक़त बेची “

या फिर

“बात जो मुझमें शोर करती है

मुझसे कहने से रह गयी होगी “

या फिर

“नींद टूटी तो “बशर” जाके ये एहसास हुआ

जिसको हाथों से सँवारा था वो सपना निकला “

विनोद कुमार त्रिपाठी जी ‘बशर’ तख़ल्लुस से शायरी करते हैं। उनका एक मजमुआ “मेरी ज़मीन के लोग” २००२ में प्रकाशित हो चुका है।त्रिपाठी जी यूइंग क्रिश्चियन कॉलेज  इलाहाबाद में  राजनीति शास्त्र के लेक्चरर भी रहे है और समाज सेवा के साथ साथ खेलकूद में भी काफ़ी रुचि रखते हैं। शायद यही वजह है कि वो भावनात्मक स्तर पर इंसान से भरपूर परिचित है और ये बात उनकी शायरी में बख़ूबी दिखती है जब वो लिखते हैं कि

“हरेक फ़र्ज़ का रिश्ता तो बस ज़मीर से है

किसी पे हम कोई एहसां कभी नहीं करते”

या फिर

“ हमारे हिस्से में सागर था, हाथ क्या आता

ज़मीं को बांटा यूँ किसने, निज़ाम किसका था”

त्रिपाठी जी की ये किताब Amazon पर भी उपलब्ध है और साथ ही साथ उर्दू के सभी मशहूर बुक स्टोर पर  भी पायी जा सकती है

Director Amitabh Kumar Comes With Another Entertainer Janam Janam Hum Tohare Sanam Bhojpuri Film

फिल्म “देवर बिना अंगना ना शोभे राजा” से दर्शको को भरपूर मनोरंजन दिये निर्देशक अमिताभ कुमार फिर एक जबरदस्त फिल्म दर्शको के बीच ले कर आ रहे है, निर्माता दुर्गेश गुप्ता और राकेश रावत फिल्म्स के बैनर तळे बन रही फिल्म “जनम जनम हम तोहरे सनम ” जिसका शूटिंग 20 नवम्बर से की जयेगी।

म्यूजिक एस कुमार का है। एक्शन रोमांसऔर कॉमेडी से भरपूर फिल्म मे आनंद देव मुख्य भूमिका मे नजर आयएंगे।उमीद है की ये फिल्म बॉक्स ऑफीस पर धमाल मचायेगी। प्रचारक अखिलेश सिंग ।

———–Akhlesh Singh (PRO)

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