याकूब मेमन की फांसी की सजा से प्रेरित है हिंदी फिल्म ”ये है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ” निशांत कुमार

सेंसर बोर्ड को लेकर विवाद अभी खत्म भी नहीं हुआ  कि एक और  हिंदी फिल्म ”ये है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ” को लेकर विवाद शुरू हो गया है. 1993 ब्लास्ट के दोषी याकूब मेमन से प्रेरित फिल्म बनाने वाले निर्माताओं ने आरोप लगाया है कि सेंसर बोर्ड में न सिर्फ उनकी फिल्म को तीन बार रिजेक्ट किया गया बल्कि फिल्म में मेमन के जिक्र वाले हर सीन को हटाने के लिए भी कहा गया.

कई कट लगाकर दिया U/A सर्टिफिकेट

सेंसर बोर्ड ने इसके पीछे कई कारण बताए, जिनमें से एक कारण याकूब मेमन जैसे किरदार का फिल्म में होना है. मेमन का जिक्र करने वाले सीन्स को हटाने के बाद ‘ये है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ’ नाम की इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने U/A सर्टिफिकेट दिया है.

ऑफ रिकॉर्ड रहा सब

फिल्म के निर्देशक मन कुमार ने कहा, ‘हमें तीन रिलीज डेट कैंसल करनी पड़ी. हमें कट और सुझाव को लेकर कुछ भी लिखित में नहीं दिया गया था. सब ऑफ रिकॉर्ड कहा गया और याकूब मेमन को फांसी पर लटकाने जैसे सीन्स को हटाया गया.’

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मेकर्स ने खुद हटाए दिए ये सीन

  1. याकूब मेमन को उसके जन्मदिन पर ही फांसी दी गई थी, इस बात का जिक्र फिल्म से हटा दिया गया.
  2. जेल में सजा काटने के दौरान एक बार उसका इंटरव्यू दिया था. इसे भी फिल्म से हटा दिया गया.
  3. याकूब को नागपुर की जेल में फांसी दी गई थी. फिल्म में कोल्हापुर जेल को नागपुर जेल के तौर पर दिखाया गया था, जिसे हटा लिया गया है.

फिल्म में याकूब मेमन का रोल कर रहे अभिनेता निशांत कुमार ने कहा, ‘मैंने फिल्म में एक्टिंग करने से पहले याकूब मेमन का इंटरव्यू ऑनलाइन देखा था ! फिल्म के अभिनेता निशांत कुमार ने बताया की याकूब की सजा से प्रेरित है फिल्म ”ये है जजमेंट हैंग्ड टिल डेथ” से ! ये फिल्म अगले माह जुलाई २०१६ में रिलीज होगी इंडिया में ! निशांत कुमार का दावा है कि फिल्म याकूब मेमन की फांसी की सजा से प्रेरित है,उसके जीवन से इसका कोई लेना-देना नहीं है.निशांत कुमार ने कहा,’ये फिल्म हिन्दू-मुस्लिम सद्भावना का संदेश देती है और ये किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं करेगी.’

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